नवरात्री के नौ दिन की कथा, नौ भोग, नौ रंग
आज 26 सितंबर को शारदीय नवरात्रि का प्रथम
दिन है. आज मां शैलपुत्री की पूजा करने का विधान है. जानते हैं मां शैलपुत्री की
पूजा विधि, मंत्र, कथा और महत्व के बारे में.
आज से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो गए हैं और इनका समापन 5 अक्टूबर को होगा। इस बार मां नवरात्रि हाथी की सवारी पर विराजमान होकर आई हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाएगा और आज माता के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की जाएगी।
शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो रहे हैं और घट स्थापना के बाद मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाएगी। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पार्वती पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और मां के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा देवी के मंडपो में पहले नवरात्र के दिन होती है। शैल का अर्थ है हिमालय और पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लेने के कारण इनका नाम शैलपुत्री पड़ा। पार्वती के रूप में इनको भगवान शिव के पत्नी के रूप में भी जाना जाता है। आइए आपको बताते हैं मां शैलपुत्री की पूजाविधि, मंत्र और भोग के बारे में विस्तार से
ऐसा है मां
शैलपुत्री का स्वरूप
माता शैलपुत्री का स्वरूप
बेहत शांत और सरल है। माता के एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल शोभा दे रहा
है। मां अपने नंदी नामक बैल पर सवार होकर संपूर्ण हिमालय पर विराजमान हैं इसलिए
माता शैलपुत्री को वृषोरूढ़ा और उमा के नाम से भी जाना जाता है। यह वृषभ वाहन शिवा
का ही स्वरूप है और शैलपुत्री समस्त वन्य जीव-जंतुओं की रक्षक भी हैं। माता
शैलपुत्री ने घोर तपस्या करके ही भगवान शिव को प्रसन्न किया था। शैलपुत्री के अधीन
वे समस्त भक्तगण आते हैं, जो योग, साधना-तप और अनुष्ठान के लिए पर्वतराज
हिमालय की शरण लेते हैं। मां अपने भक्तों की हमेशा मनोकामना पूरी करती हैं।
ऐसे करें मां
शैलपुत्री की पूजा
शारदीय नवरात्रि के प्रथम
दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत स्वच्छ वस्त्र धारण करें और फिर
चौकी को गंगाजल से साफ करके मां दुर्गा की मूर्ति या फोटो स्थापित करें। पूरे
परिवार के साथ विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की जाती है। घट स्थापना के बाद मां
शैलपुत्री का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। माता शैलपुत्री की पूजा
षोड्शोपचार विधि से की जाती है। इनकी पूजा में सभी नदियों, तीर्थों और दिशाओं का आह्वान
किया जाता है। इसके बाद माता को कुमकुम और अक्षत लगाएं। इसके बाद सफेद, पीले या लाल फूल माता को अर्पित करें। माता के सामने धूप, दीप जलाएं और पांच देसी घी के दीपक जलाएं। इसके बाद माता की आरती
उतारें और फिर शैलपुत्री माता की कथा, दुर्गा चालिसा,
दुर्गा स्तुति या दुर्गा सप्तशती आदि का पाठ करें। इसके बाद
परिवार समेत माता के जयकारे लगाएं और भोग लगाकर पूजा को संपन्न करें। शाम के समय
में भी माता की आरती करें और ध्यान करें।
घट स्थापना का
मुहूर्त
नवरात्र में इस बार कलश
स्थापना के लिए 2 शुभ मुहूर्त हैं। नवरात्र से पहले बारिश संकेत दे रही कि इस बार मां
दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है। पंडितों का मानना है कि हाथी पर मां दुर्गा का
आगमन धन-धान्य में बढ़ोतरी करता है। ज्योतिषाचार्यों ने बताया कि सोमवार को
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:11 से 7:51 तक रहेगा। इसके बाद अभिजित मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है।
सुबह 11:48 से दोपहर 12:36 तक
अभिजित मुहूर्त रहेगा। इस बार नवरात्र शुक्ल व ब्रह्म योग के अद्भुत संयोग में
शुरू हो रहा है, जिसका फल उत्तम मिलता है। ज्योतिष के
अनुसार, बारिश संकेत दे रही है कि नवरात्र में मां हाथी
पर सवार होकर आएंगी। इससे अच्छी बारिश होगी और फसल भी अच्छी होगी। हर साल शारदीय
नवरात्रि पर मां दुर्गा का आगमन विशेष तरीके से होता है। रविवार व सोमवार को हाथी
पर, शनि व मंगलवार को घोड़े पर, बृहस्पति
व शुक्रवार को डोले पर तथा बुधवार को नाव पर मां दुर्गा आती हैं। घोड़े पर आने से
राजाओं में युद्ध होता है। नाव पर आने से सब कार्यों में सिद्ध मिलती है। डोले पर
आती हैं तो उस वर्ष अनेक कारणों से बहुत लोगों की मृत्यु होती है।
माता को प्रिय
हैं ये चीजें
पर्वतराज हिमालय की पुत्र
होने के कारण माता की पूजा और भोग में सफेद चीजों का ज्यादा प्रयोग करें। माता को
सफेद फूल और सफेद वस्त्र ही अर्पित करें। इसके साथ ही माता को सफेद मिष्ठान का ही
भोग लगाएं। माता शैलपुत्री की पूजा करने से कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य वर की
प्राप्ति होती है और घर में धन-धान्य की कमी नहीं होती है। माता के इस स्वरूप को
जीवन में स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। शैल का अर्थ होता है पत्थर
और पत्थर को सदैव अडिग माना जाता है।
मां शैलपुत्री के पूजा मंत्र
मां शैलपुत्री का मंत्र इस प्रकार है…
वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्॥
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥
प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुंग कुचाम् ।
कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम् ॥
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।
ओम् शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।
माता शैलपुत्री की आरती
मां शैलपुत्री की आरती शैलपुत्री मां बैल पर सवार।
करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा
किसी ने ना जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे
सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे
धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी
जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ
मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का
भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित
फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र
चकोरी अंबे।
नोकामना
पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
Navratri 2nd Day 2022: नवरात्रि का दूसरा दिन आज, जानें शुभ मुहूर्त, मां ब्रह्मचारिणी पूजन विधि, शुभ रंग व भोग
शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन 27 सितंबर 2022, मंगलवार को है। नवरात्रि के
दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती
है। माता रानी के स्वरूप की बात करें तो शास्त्रों के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी श्वेत वस्त्र
धारण किए हैं और दाएं हाथ में अष्टदल की माला और बाएं हाथ में कमंडल लिए सुशोभित
हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए
कठोर तप किया था, जिस वजह से मां को तपश्चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से जाना
जाता है। पुराणों में बताया गया है कि मां ब्रह्माचारिणी की पूजा- अर्चना करने से
सर्वसिद्धि प्राप्त होती हैं।
मां ब्रह्मचारिणी की प्रिय वस्तु
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार
मां ब्रह्मचारिणी को गुड़हल, कमल, श्वेत और सुगंधित पुष्प प्रिय हैं। ऐसे में नवरात्रि के दूसरे दिन
मां दुर्गा को गुड़हल, कमल, श्वेत और सुगंधित पुष्प अर्पित करें।
मां ब्रह्मचारिणी का भोग-
मां दुर्गा को नवरात्रि के
दूसरे दिन चीनी का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से दीर्घायु का आशीष
मिलता है। मां ब्रह्मचारिणी को दूध और दूध से बने व्यंजन जरूर अर्पित करें।
पूजा- विधि-
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित
करने के बाद मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें।
अब मां
दुर्गा को अर्घ्य दें।
मां को
अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई
चढ़ाएं।
धूप और
दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें।
मां को
भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया
जाता है।
मंत्र-
श्लोक-
दधाना
करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलु| देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा ||
ध्यान मंत्र-
वन्दे
वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलु
धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
Navratri
3rd Day 2022: नवरात्रि का तीसरा दिन आज, जानें मां चंद्रघंटा की पूजन विधि, शुभ मुहूर्त, भोग व शुभ रंग
Navratri 3rd day 2022, Maa Chandraghanta: नवरात्रि के पावन पर्व में मां
दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा
की पूजा की जाती है। नवरात्रि का तीसरा दिन 28 सितंबर 2022, बुधवार को है। देवी पुराण के
अनुसार देवी दुर्गा के तृतीय स्वरूप को चंद्रघंटा कहा जाता है। देवी के मस्तक पर
घंटे के आकार का अर्द्धचंद्र सुशोभित है, इसलिए इनका नाम चंद्रघंटा पड़ा।
जानें नवरात्रि के तीसरे दिन का शुभ मुहूर्त, रंग, भोग व अन्य खास बातें-
मां चंद्रघंटा का स्वरूप-
माता का तीसरा रूप मां
चंद्रघंटा शेर पर सवार हैं। दस हाथों में कमल और कमडंल के अलावा अस्त-शस्त्र
हैं। माथे पर बना आधा चांद इनकी पहचान है। इस अर्ध चांद की वजह के इन्हें
चंद्रघंटा कहा जाता है।
मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढा
चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं
तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।
वस्त्र-
मां चंद्रघंटा की पूजा में
उपासक को सुनहरे या पीले रंग के वस्त्र पहनने चाहिए।
पुष्प-
मां को
सफेद कमल और पीले गुलाब की माला अर्पण करें।
भोग-
मां को केसर की खीर और दूध से
बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। पंचामृत, चीनी व मिश्री भी मां को अर्पित
करनी चाहिए।
Navratri 4th Day 2022: नवरात्रि का चौथा दिन आज, जानें मां कूष्मांडा की पूजन
विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग व रंग
Navratri 4th Day 2022: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की विधि-विधान के साथ
पूजा की जाती है। जानें नवरात्रि के चौथे दिन किस मुहूर्त में करें पूजा व जानें
अन्य खास बातें-
मां कूष्मांडा का स्वरूप-
मां कूष्मांडा की आठ भुजाएं हैं। मां
को अष्टभुजा देवी के नाम से भी जाना जाता है। इनके सात हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में
जपमाला है। मां सिंह का सवारी करती हैं।
नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ
रंग-
नवरात्रि के चौथे दिन हरा रंग पहनना
शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मां कूष्मांडा को हरा रंग अतिप्रिय है।
मां कूष्मांडा का भोग-
मां कूष्मांडा को भोग में मालपुआ
चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि इस भोग को लगाने से मां कूष्मांडा प्रसन्न होती हैं
और भक्तों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखती हैं।
मां कूष्मांडा पूजा विधि-
सबसे पहले स्नान आदि से निवृत्त हो
जाएं।
इसके बाद
मां कूष्मांडा का ध्यान कर उनको धूप, गंध, अक्षत्, लाल पुष्प, सफेद कुम्हड़ा, फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान
अर्पित करें।
इसके बाद
मां कूष्मांडा को हलवे और दही का भोग लगाएं। आप फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण
कर सकते हैं।
मां का
अधिक से अधिक ध्यान करें।
पूजा के
अंत में मां की आरती करें।
देवी कूष्मांडा मंत्र-
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:
5th Navratri : पांचवीं नवरात्रि आज, स्कंदमाता की इस विधि से करें
पूजा, नोट कर लें शुभ मुहूर्त, भोग, मंत्र और मां की आरती
5th Navratri : हिंदू
धर्म में नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व होता है। 26 सितंबर से
नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत हो गई है। नवरात्रि का पर्व नौ दिनों तक बड़े ही
धूम- धाम से मनाया जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा-
अर्चना की जाती है। 30 सितंबर को पांचवीं नवरात्रि है। नवरात्रि के
पांचवें दिन मां के पंचम स्वरूप माता स्कंदमाता की पूजा- अर्चना की जाती है। मां
अपने भक्तों पर पुत्र के समान स्नेह लुटाती हैं। मां की उपासना से नकारात्मक
शक्तियों का नाश होता है। मां का स्मरण करने से ही असंभव कार्य संभव हो जाते हैं।
- स्कंदमाता कमल के आसन पर विराजमान हैं, इसी कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। मां
स्कंदमाता को पार्वती एवं उमा नाम से भी जाना जाता है। मां की उपासना से
संतान की प्राप्ति होती है। मां का वाहन सिंह है। मां स्कंदमाता सूर्यमंडल की
अधिष्ठात्री देवी हैं।
मां स्कंदमाता को
प्रिय हैं ये चीजें
- मां की उपासना से परम शांति और सुख का अनुभव होता है।
मां स्कंदमाता को श्वेत रंग प्रिय है। मां की उपासना में श्वेत रंग के
वस्त्रों का प्रयोग करें। मां की पूजा के समय पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
स्कंदमाता पूजा
विधि...
- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद
साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- मां की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं।
- स्नान कराने के बाद पुष्प अर्पित करें।
- मां को रोली कुमकुम भी लगाएं।
- मां को मिष्ठान और पांच प्रकार के फलों का भोग लगाएं।
- मां स्कंदमाता का अधिक से अधिक ध्यान करें।
- मां की आरती अवश्य करें।
मां का भोग-
- मां को केले का भोग अति प्रिय है। मां को आप खीर
का प्रसाद भी अर्पित करें।
संतान सुख की
प्राप्ति होती है
- मां स्कंदमाता की कृपा से संतान सुख की प्राप्ति होती
है। मां को विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है। मां की उपासना से
अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है।
स्कंदमाता का
मंत्र...
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
Navratri 6th Day: नवरात्रि का छठा दिन है मां
कात्यायनी को समर्पित, जानिए
पूजा विधि, आरती, मंत्र और प्रिय भोग
Shardiya Navratri 2022 6th Day: 01अक्टूबर
को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानी शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है।
इस दिन मां दुर्गा के छठें स्वरूप देवी कात्यायनी की पूजा करने का विधान है।
Shardiya
Navratri 2022 6th Day: 01अक्टूबर को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि यानी
शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के छठें स्वरूप देवी कात्यायनी
की पूजा करने का विधान है। कहा जाता है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से भक्तों
को आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष की प्राप्ति
होती है। मां कात्यायनी का स्वरूप चमकीला और तेजमय है। इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं
तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में रहता है। वहीं नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में है।
मां कात्यायनी के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार धारण करती हैं व नीचे वाले
हाथ में कमल का फूल सुशोभित रहता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भी जातक देवी कात्यायनी
की पूजा पूरी श्रद्धा से करता है, उसे परम पद की प्राप्ति होती है।
मां कात्यायनी की पूजा विधि
नवरात्रि के छठे दिन इस दिन प्रातः काल
में स्नान आदि से निवृत्त होकर मां का गंगाजल से आचमन करें। फिर देवी कात्यायनी का
ध्यान करते हुए उनके समक्ष धूप दीप प्रज्ज्वलित करें। रोली से मां का तिलक करें
अक्षत अर्पित कर पूजन करें। इस दिन मां कात्यायानी को गुड़हल या लाल रंग का फूल
चढ़ाना चाहिए। अंत में मां कात्यायनी की आरती करें और क्षमायाचना करें।
मां कात्यायनी प्रिय भोग
इस दिन मां कात्यायनी को पूजन में शहद का
को भोग लगाना चाहिए। इससे मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाओं को
पूर्ण करती हैं।
मां कात्यायनी आराधना मंत्र
1.या देवी
सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
2.चंद्र
हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना|
कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि||
मां कात्यायनी की आरती
जय-जय अम्बे जय कात्यायनी
जय जगमाता जग की महारानी
बैजनाथ स्थान तुम्हारा
वहा वरदाती नाम पुकारा
कई नाम है कई धाम है
यह स्थान भी तो सुखधाम है
हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी
हर जगह उत्सव होते रहते
हर मंदिर में भगत हैं कहते
कत्यानी रक्षक काया की
ग्रंथि काटे मोह माया की
झूठे मोह से छुडाने वाली
अपना नाम जपाने वाली
बृहस्पतिवार को पूजा करिए
ध्यान कात्यायनी का धरिए
हर संकट को दूर करेगी
भंडारे भरपूर करेगी
जो भी मां को 'चमन' पुकारे
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।
7th Day of Navratri : मां कालरात्रि को प्रसन्न करने
के लिए इस विधि से करें पूजा- अर्चना, नोट कर लें सिद्ध मंत्र
आज नवरात्रि
का सातवां दिन है। नवरात्रि के सातवें दिन मां के सातवें स्वरूप
मां कालरात्रि की पूजा- अर्चना की जाती है। मां
कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। मां के बाल लंबे और बिखरे हुए हैं। मां
के गले में माला है जो बिजली की तरह चमकते रहती है। मां कालरात्रि के चार हाथ हैं।
मां के हाथों में खड्ग, लौह शस्त्र, वरमुद्रा
और अभय मुद्रा है। आइए जानते हैं मां कालरात्रि की पूजा- विधि और
मंत्र
मां कालरात्रि पूजा
विधि...
सुबह जल्दी उठकर
स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।
मां की प्रतिमा
को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं।
मां को लाल रंग
के वस्त्र अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां को लाल रंग पसंद है।
मां को स्नान
कराने के बाद पुष्प अर्पित करें।
मां को रोली
कुमकुम लगाएं।
मां को मिष्ठान, पंच मेवा, पांच प्रकार के फल अर्पित करें।
मां कालरात्रि को
शहद का भोग अवश्य लगाएं।
मां कालरात्रि का
अधिक से अधिक ध्यान करें।
मां की आरती भी
करें।
मां कालरात्रि का सिद्ध मंत्र-
‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै
विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम:।’
मंत्र-
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना
खरास्थिता।
लम्बोष्ठी
कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा
कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥
Navratri 8th Day : नवरात्रि के आठवें दिन होती है
मां महागौरी की पूजा
8th day of navratri maa mahagauri puja : 3 अक्टूबर, सोमवार को
शारदीया नवरात्रि का आठवां दिन है। शारदीय
नवरात्रि के आठवें दिन मां के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा- अर्चना की जाती
है।
8th day of navratri maa
mahagauri puja : 3 अक्टूबर, सोमवार को
शारदीया नवरात्रि का आठवां दिन है। शारदीय नवरात्रि
के आठवें दिन मां के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा- अर्चना की जाती है।
नवरात्रि के दौरान मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के आठवें दिन का
महत्व बहुत अधिक होता है। इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है। मां महागौरी का रंग
अंत्यत गोरा है। इनकी चार भुजाएं हैं और मां बैल की सवारी करती हैं। मां का स्वभाव
शांत है। आइए जानते हैं मां महागौरी की पूजा विधि, महत्व, मंत्र, भोग और आरती...
मां महागौरी पूजा
विधि...
- सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद
साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- मां की प्रतिमा को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं।
- मां को सफेद रंग के वस्त्र अर्पित करें। धार्मिक
मान्यताओं के अनुसार मां को सफेद रंग पसंद है।
- मां को स्नान कराने के बाद सफेद पुष्प अर्पित करें।
- मां को रोली कुमकुम लगाएं।
- मां को मिष्ठान, पंच मेवा, फल अर्पित करें।
- मां महागौरी को काले चने का भोग अवश्य लगाएं।
- मां महागौरी का अधिक से अधिक ध्यान करें।
- मां की आरती भी करें।
- अष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है।
इस दिन कन्या पूजन भी करें।
मां महागौरी मंत्र
मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
ध्यान मंत्र
वन्दे वांछित
कामार्थेचन्द्रार्घकृतशेखराम्।
सिंहारूढाचतुर्भुजामहागौरीयशस्वीनीम्॥
पुणेन्दुनिभांगौरी
सोमवक्रस्थितांअष्टम दुर्गा त्रिनेत्रम।
वराभीतिकरांत्रिशूल
ढमरूधरांमहागौरींभजेम्॥
पटाम्बरपरिधानामृदुहास्यानानालंकारभूषिताम्।
मंजीर, कार, केयूर, किंकिणिरत्न कुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांपल्लवाधरांकांत
कपोलांचैवोक्यमोहनीम्।
कमनीयांलावण्यांमृणालांचंदन
गन्ध लिप्ताम्॥
स्तोत्र मंत्र
सर्वसंकट हंत्रीत्वंहिधन
ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदाचतुर्वेदमयी,महागौरीप्रणमाम्यहम्॥
सुख शांति दात्री, धन धान्य प्रदायनीम्।
डमरूवाघप्रिया अघा
महागौरीप्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यमंगलात्वंहितापत्रयप्रणमाम्यहम्।
वरदाचैतन्यमयीमहागौरीप्रणमाम्यहम्॥
कवच मंत्र
ओंकार: पातुशीर्षोमां, हीं बीजंमां हृदयो।
क्लींबीजंसदापातुनभोगृहोचपादयो॥
ललाट कर्णो,हूं, बीजंपात महागौरीमां नेत्र
घ्राणों।
कपोल चिबुकोफट् पातुस्वाहा मां
सर्ववदनो॥
मां महागौरी की आरती
जय महागौरी जगत की माया ।
जय उमा भवानी जय महामाया ॥
हरिद्वार कनखल के पासा ।
महागौरी तेरा वहा निवास ॥
चंदेर्काली और ममता अम्बे
जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥
भीमा देवी विमला माता
कोशकी देवी जग विखियाता ॥
हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा
॥
सती 'सत' हवं कुंड मै था जलाया
उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥
बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया
॥
तभी मां ने महागौरी नाम पाया
शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥
शनिवार को तेरी पूजा जो करता
माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता
॥
'चमन' बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो
महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो
॥
मां महागौरी पूजा
महत्व
- मां महागौरी की पूजा- अर्चना करने से विवाह में आ रही
समस्याएं दूर हो जाती हैं।
- मां की कृपा से मनपंसद जीवनसाथी मिलता है।
- मां महागौरी की अराधना करने से संकट दूर होते हैं
पापों से मुक्ति मिलती है।
- व्यक्ति को सुख-समृद्धि के साथ सौभाग्य की प्राप्ति भी
होती है।
Navratri 9th Day 2022: महानवमी आज, जानें मां सिद्धिदात्री की पूजन
विधि, शुभ रंग, भोग, मुहूर्त, मंत्र व आरती
Maha Navami 2022, Maa Siddhidatri: महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इस दिन
कन्या पूजन का भी विधान है।
Navratri 9th Day 2022, Maha
navami Pujan : नवरात्रि का समापन नवमी तिथि से होता है। इस साल शारदीय
नवरात्रि की नवमी तिथि 4 अक्टूबर, मंगलवार को है। नवरात्रि के नवम दिन
मां दुर्गा के स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां
सिद्धिदात्री भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें यश, बल और धन
भी प्रदान करती हैं।
शास्त्रों में मां सिद्धिदात्री को सिद्धि और मोक्ष की देवी
माना जाता है। मां सिद्धिदात्री महालक्ष्मी के समान कमल पर विराजमान हैं। मां के
चार हाथ हैं। मां ने हाथों में शंख, गदा, कमल का
फूल और च्रक धारण किया है। मां सिद्धिदात्री को माता सरस्वती का रूप भी मानते हैं।
नवमी तिथि पर कन्या पूजन भी किया जाता है। अगर आप भी नवमी पर कन्या पूजन करने जा
रहे हैं तो जान लें शुभ मुहूर्त व अन्य खास बातें-
पूजा- विधि-
सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से
निवृत्त होने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
मां की
प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराएं।
स्नान
कराने के बाद पुष्प अर्पित करें।
मां को
रोली कुमकुम भी लगाएं।
मां को
मिष्ठान और पांच प्रकार के फलों का भोग लगाएं।
मां
स्कंदमाता का अधिक से अधिक ध्यान करें।
मां की
आरती अवश्य करें।
मां सिद्धिदात्री का भोग-
मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री
को मौसमी फल, चना, पूड़ी, खीर, नारियल और हलवा अतिप्रिय है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री को
नवमी पर इन चीजों का भोग लगाने से वह प्रसन्न होती हैं।
पूजा मंत्र-
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि,
सेव्यमाना
सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।
मां सिद्धिदात्री आरती-
जय
सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।
तू
भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।
तेरा नाम
लेते ही मिलती है सिद्धि।
तेरे नाम
से मन की होती है शुद्धि।
कठिन काम
सिद्ध करती हो तुम।
जभी हाथ
सेवक के सिर धरती हो तुम।
तेरी
पूजा में तो ना कोई विधि है।
तू
जगदंबे दाती तू सर्व सिद्धि है।
रविवार
को तेरा सुमिरन करे जो।
तेरी मूर्ति
को ही मन में धरे जो।
तू सब
काज उसके करती है पूरे।
कभी काम
उसके रहे ना अधूरे।
तुम्हारी
दया और तुम्हारी यह माया।
रखे
जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।
सर्व
सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।
जो है
तेरे दर का ही अंबे सवाली।
हिमाचल
है पर्वत जहां वास तेरा।
महा नंदा
मंदिर में है वास तेरा।
मुझे
आसरा है तुम्हारा ही माता।
भक्ति है
सवाली तू जिसकी दाता।









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